Sunday, 12 February 2017

चैना राम के कराची हलवा लाए मुंह में पानी

अगर आप पुराने दिल्ली के फतेहपुर चौक से गुजर रहे हैं और अचानक ही देशी घी की खुशबू आने लगे तो हैरान होने की जरूरत नहीं। यह खुशबू सौ फीसद चैना राम हलवाई की दुकान से आ रही होगी। चांदनी चौक की यहां एक सदी पुरानी यह मिठाई की दुकान केवल देशी ग्राहकों के बीच ही नहीं बल्कि विदेशी ग्राहकों के बीच भी लोकप्रिय है। 

113 साल पुरानी है दुकान 
चैना राम हलवाई की यह दुकान आजादी से पहले की है और इसे शुरू हुए 113 साल बीत चुके हैं। इस दुकान की शुरुआत सिंधी व्यापारी  नीचा राम ने अपने भाइयों के साथ मिलकर 1901 में की थी। फिलहाल उनकी पांचवी पीढ़ी यह विरासत संभाल रही है। 

कराची हलवा है लजीज 
चैना राम की दुकान की खासियत यह है कि यहां सभी मिठाइयां शुद्ध घी में बनाई जाती हैं। यहां गाजर का हलवाए मूंग हलवाए सोहन हलवाए पिस्ता हलवाए बादाम हलवा और घेवर आदि उपलब्ध है और इनका स्वाद लाजवाब हालांकि यहां का कराची हलवा खाने के लिए लोग दूर दूर से आते हैं। यहां का हलवा अन्य दुकानों की तुलना में कम मीठा और काफी नर्म होता है। साथ ही इसे बनाने में किसी प्रिजरवेटिव का इस्तेमाल भी नहीं किया जाता है।  वे दुकान में बैठकर इसका आनंद तो उठाते ही हैं पर साथ ही अपने अपनों के लिए भारी मात्रा में इसे पैक कर के भी ले जाते हैं। त्योहारों और शादी ब्याह के मौके पर लोग खासतौर पर यहां सेब बादाम बर्फी और घेवर ऑर्डर करके बनवाते हैं। यहां मिठाई और हलवे की कीमतें 200 रुपये प्रति किलों से शुरू होकर करीब 700 रुपये प्रति किलो तक जाती हैं। 

साल भर रहती हैं भीड़ 
इस भीड़ भाड़ वाले इलाके में वैसे तो कई नई दुकानें खुल गई हैं। इसके बावजूद अपने स्वाद और गुणवत्ता के कारण चैना राम की दुकान में सबसे ज्यादा भीड़ होती है। यही कारण है कि साल भर चैना राम की दुकान में भारी भीड़ रहती है। दुकान में जाकर ऑर्डर देने के अलावा यहां लोग ऑनलाइन मिठाइयों का ऑर्डर दे सकते हैं। 


स्नैक्स भी हैं उपलब्ध 
चांदनी चौक की यह पुरानी दुकान केवल मिठाइयों के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है बल्कि यहां के स्नैक्स भी लोगों को काफी पसंद आते हैं। यहां की कचौड़ीए चीज पकौड़ाए आलू लच्छाए काजू फ्राइडए नवरत्न नमकीन और दालमोठए मट्ठी और समोसे भी लोगों को खासे पसंद आते हैं। खास बात यह है कि मिठाइयों के  साथ ही यह मिलने वाले सारे स्नैक्स भी घी में बनाए जाते हैं। 

चैना राम हलवाई  के कराची हलवे की विशेषता
चैना राम के मैनेजर व दुकान के संस्थापक नीचा राम पर पोते कुनाल ने बताया कि चैना राम हलवाई के कराची हलवा का स्वाद अन्य मिठाई के दुकानों से अलग है । दरअसल यह बेहद नर्म होता है इसे भारतीय पाक परंपरा के अनुसार शुद्ध घी में बनाया जाता है। हमारे यहां इसमें हल्की चीनी डाली जाती है जबकि अन्य दुकानों का कराची हलवा ज्यादा मीठा होता है। साथ ही इसमें कोई रंग या फिर प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल नहीं किया जाता जबकि बाकी लोग इसमें नारंगी रंग मिलाते हैं। प्रिजर्वेटिव के भी एक सप्ताह तक लोग इसे रख सकते हैं। 

काके दी हट्टी- युवाओं की आलटाइम फेवरिट Kake Di Hatti

चांदनी चौक फतेपुर चौक पर स्थित काके दी हट्टी युवाओं की पहली पसंद है। दशकों पुराने इस रेस्तरां के जायके की खासियत हैं इसके मसाले जो आज के आधुनिक दौर में भी इमामदस्ते से पीसे जाते हैं। और इनसे बनने वाले व्यंजनों का स्वाद आज भी पहले जैसा है।

62 साल पुराना रेस्तरां
काके दी हट्टी  62 साल पुराना रेस्तरां है। इसे सरदार साहिब सिंह ने शुरू किया था और फिलहाल इसे परिवार की चौथी पीढ़ी चला रही है। फिलहाल इसका संचालन सरदार गुरजीत सिंह द्वारा किया जा रहा है। गुरजीत सिंह के मुताबिक ग्राहकों की मांग पर रेस्तरां के मीनू में समय समय पर बदलाव किए जाते रहते हैं।


कभी बंद नहीं रहा रेस्तरां
गुरजीत सिंह के मुताबिक पिछले 62 सालों में उनका रेस्तरां कभी एक दिन के लिए भी बंद नहीं किया गया। काके दी हट्टी सुबह 8 बजे से खुलती हैं और रात 1 बजे तक यहां खाना परोसा जाता है। उन्होंने बताया कि इतने सालों में रेस्तरां के व्यंजनों के जायके में भी कोई परिवर्तन नहीं हुआ। यहां आज भी मसाले इमामदस्ते में पीसे जाते हैं जिससे उनका वास्तविक स्वाद व खुशबू बरकरार रहे।

15 गुना 15 इंच का नान
रेस्तरां में 22 तरह के  भरवा नान उपलब्ध है। इसमें आलूए मूलीए लौकीए मटर आलूए हरियाली आलूए आलू प्याजए गोभीए मेथीए खोयाए मिक्सए सोयाए मटर पनीरए मशरूमए  शिमला मिर्च आदि भरकर बनाया जाता है। हालांकि ग्राहकों को यहां की आलू भरी नान खासी पसंद आती हैं जिसके चलते सबसे ज्यादा मांग इसी की है। यही कारण है कि यहां की नान का आकार 15 गुना 15 इंच का है। गुरजीत सिंह का दावा है कि इतना बड़ा नान किसी और रेस्तरां में नहीं मिलता है। एक नान दो व्यक्तियों के लिए काफी है।


युवाओं के बीच है लोकप्रिय
वैसे तो काके दी हट्टी में हर आयु वर्ग के लोग यहां के लजीज व्यंजनों का जायका लेने आते हैं। हालांकि यहां आने वाले युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है। खाना खाने आए 26 वर्षीय छात्र सुमित ने बताया कि इस रेस्तरां में खाने की वराइटी काफी ज्यादा हैं और यह किफायती दामों में उपलब्ध हैं। यही कारण है कि सप्ताह में एक बार यहां के लजीज खाने का लुत्फ तो वे उठा ही लेते हैं। उन्होंने बताया कि यहां दाल मक्खनीए चना मसालाए अरहर की दाल बिना लहसन और प्याज के बनाई जाती है इसके बावजूद इसका जायका लाजवाब है। यहां 18 तरह की सब्जियां कड़ाही पनीरए पनीर बटर मसालाए मलाई कोफ्ताए मटर मशरूमए सोया मसाला चापए सोया कढाई चापए सोया पालक चापए सरसो का सागए मिक्स वेज जैसे अनेकों लजीज व्यंजन उपलब्ध हैं। सुमित के मुताबिक यहां चावल की भी 13 वराइटी हैं जो कहीं और नहीं मिलती। यही कारण है कि काके दी हट्टी का जायका उन्हें किसी भी अन्य रेस्तरां के मुकाबले काफी पसंद है।

Friday, 3 February 2017

गली पराठे वाली.... जहां पराठे का स्‍वाद खींच लाता है

आपको किसी भी तरह की खरीदारी क्यों न करनी हो, चांदनी चौक से अच्छा शायद ही राजधानी में कोई अन्य बाजार है। हालांकि यह बाजार केवल कपड़ों, आभूषण, मेवे, अनाज व इलेक्ट्रॉनिक आइटम के लिए ही नहीं जाना जाता। अगर आपको पराठे खाने हो तो भी इस बाजार से अच्छी शायद ही कोई अन्य जगह है। चांदनी चौक की पराठे वाली गली में आपको आलू पराठे से लेकर मेवा पराठे तक हर तरह के पराठे मिलेंगे। 

चांदनी चौक के पराठों की गली अपने पचासों तरह के लजीज पराठों के लिए जानी जाती है। पुरानी दिल्ली की यह गली राजधानीवासीयों के दिलों में अपने स्वाद की वजह से अलग स्थान तो रखती ही है पर पर्यटकों के बीच भी खासी पहचानी जाती है। देश विदेश से दिल्ली आनेवाले पर्यटक एक बार यहां रुक कर जरुर इन लजीज पराठों का लुत्फ उठाना चाहते हैं। इन पराठों के जायके का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इन्हें खाने के लिए हर वक्त पराठे वाली गली में लोगों की लंबी कतार रहती है। करीब डेढ़ सौ साल से चांदनी चौक में मौजूद इस गली की  मुरीद के केवल आज की दिल्ली नहीं है बल्कि जवाहरलाल नेहरु ए इंदिरा गांधीए  राजीव गांधी से लेकर प्रमोद महाजन ए अक्षयकुमार तक यहां के पराठों का लुत्फ उठा चुके हैं। 

मिलती है 50 तरह के पराठे 
पराठे वाली गली में  आलू पराठा नींबू पराठा ए बादाम पराठा ए मिर्च पराठा ए काजू पराठाए किशमिश पराठा ए खोया पराठा ए खुर्चन पराठा ए मिक्स पराठाए केला पराठाए रबड़ी पराठाए  पापड़ पराठा जैसे पचासों तरह के लजीज पराठे बनाए जाते हैं। यहां कुल चार दुकानदार हैं जो आपस में रिश्तेदार हैं और उनकी ये दुकानें उनके पूर्वजों द्वारा शुरू की गई थीं। 

65 रुपये में मिलता है एक पराठा
पराठेवाली गली में 50 से 65 रुपये में एक पराठा मिलता है और यहां पर एक बार में केवल 2  पराठे का ऑर्डर लिया जाता है।  ऐसे में गर्म.गर्म  लजीज पराठे के साथ ही यहां तीन तरह की सब्जी ए दो तरह की चटनी और अचार भी लोगों को परोसे जाते हैं। अपनी इच्छानुसार लोग लस्सी का ऑर्डर भी दे सकते हैं। 



यहां पराठे की चार हैं दुकानें 
पराठे वाली गली में पराठे की कुल चार  दुकाने हैं जिसमें सबसे पुरानी है  शॉप नम्बर 34ए पंडित गया प्रसाद शिव चरण  जी की दुकान जिसे 1872 में स्थापित किया गया था।  जिनकी छठवी पीढ़ी लोगों को लजीज पराठे खिला रही है । इनके परपोते अनिल शर्मा अपने पूर्वजों की विरासत और पराठों के स्वाद को ज्यों के त्यों बनाये रखने में सफल रहे हैैं । 

Saturday, 7 January 2017

......90 सालों से आल टाइम फेवरिट चाट

याद कीजिए, बचपन के दिन। कभी गांव की गली या फिर कालोनी की सड़क पर गुजरते समय। कानों में साइकिल पर चाट बेचने वाले द्वारा बजाई गई घंटी की आवाज गूंजते ही मुंह में पानी आ जाता था। चाचा, भैया, पापा से रो-रोकर जिद कर चाट और पानी पूरी खाते थे। तो आज हम आपको पुरानी दिल्ली में एक ऐसा ठिकाना बता रहे हैं जहां आपको ना केवल बचपन के दिन याद आएंगे बल्कि स्वाद का ऐसा ठौर मिलेगा जिसे ताउम्र आप याद रखेंगे। 


चांदनी चौक में करीब 90 साल पहले बालाजी चाट भंडार की दुकान खुली थी। तब से यह दुकान चाट के शौकीनों की पसंदीदा दुकान रही है। वैसे तो यहां अलग अलग प्रकार के चाट मौजूद हैं लेकिन जिस चाट के लिए लोग खींचे चले आते हैं वो हैं यहां की पापड़ी चाट।
चाट भंडार की पापड़ी चाट को खास बनाते हैं आलू, कचालू, चटनी, खस्ता पापड़ी और सोंठ की चटनी। चांदनी चौक में फव्वारा चौक के पास स्थित इस चाट की दुकान में गोल गप्पे, दही भल्लाए पापड़ी, फ्रूट चाट, आलू टिकिया का स्वाद काफी लोकप्रिय है। काम संभालते वरूण कहते हैं कि उनके दादा चुन्नी लाल ने 1923 में दुकान खोली थी। चाट बनाने के लिए मसालों की एक खास रेसिपी का इस्तेमाल किया जाता है जो उनके दादा जी ने ही तैयार की थी जिसे उन्होंने ऐसा ही बरकरार रखा है। वरुण के मुताबिक फ्रूट चाट बनाने के लिए केवल मौसमी फलों का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें अनार, सेब, संतरा, अंगूर जैसे फलों का इस्तेमाल किया जाता है। बालाजी चाट भंडार के बाहर चाट के जायके के शौकीन लाइन लगाकर खाते हैं। 



Friday, 6 January 2017

दौलत की चाट का जायका भूलना है मुश्किल


दूध, क्रीम, चीनी और इसके उपर केसर से गार्निशिंग। आ गया ना मुंह में पानी। यह रेसिपी किसी केक या आइसक्रीन की रेसिपी नहीं है बल्कि चाट की है। जी हां यह सुनने में आपको थोड़ा अटपटा जरूर लग सकता है कि आखिर ये कैसी चाट। आमतौर पर मसालों और आलू से ही चाट भारत में बनती है लेकिन जनाब यही तो खासियत है चांदनी चौक स्थित नई सड़क पर मिलने वाली इस दौलत की चाट का।

 जायका ही कुछ ऐसा है कि इसे एक बार खाने का बाद भूलना बेहद मुश्किल। दरअसल दौलत की चाट कहने को तो चाट है लेकिन वास्तव में यह एक स्वीट डिश है जिसका स्वाद एक बार खाने के हमेशा याद रहता है। तभी तो राजधानीवासियों के साथ ही चांदनी चौक में आने वाले पर्यटकों के बीच भी यह काफी लोकप्रिय है। 
दौलत की चाट के मालिक जसपाल के मुताबिक उनकी यह दुकान चांदनी चौक में 20 साल पुरानी है। चाट की खास बात है इसकी रेसिपी। खाने में यह चाट भले ही बेहद स्वादिष्ट लगती हो पर इसे बनाना उतना ही मुश्किल है। एक पतीला चाट बनाने के में करीब चार से पांच घंटे का समय लगता है। जसपाल के मुताबिक पहले दूध को घंटों फेटा जाता है। साथ साथ इसमें क्रीम मिलाई जाती है। चाट को तैयार करने का यह सिलसिला यहां नहीं रुकता है। 


जसपाल बताते हैं कि इसके चाट में बूरा डाला जाता है जो पिसी हुई चीनी है। इतना ही नहीं चाट का जायका और बढ़ाने के लिए इसमें खोया डाला जाता है। लोगों को इस स्वीटडिश में आइसक्रीम का मजा भी आ सके इसके लिए इसमें पिसी हुई बर्फ मिलाई जाती है और इसके केसर डाला जाता है। करीब सात प्रक्रिया के बाद तैयार होती है दौलत की चाट जो मुंह में डालते ही घुल जाती है पर इसका स्वाद जुबां पर बरकरार रहता है। 
जसपाल बताते हैं कि केवल दिल्लीवासी ही नहीं बल्कि विदेश से आने वाले कुछ पर्यटक भी ऐसे हैं जो साल में इक्का दुक्का बार ही भारत आते हैं पर जब भी वे आते हैं तो उनकी चाट खाना नहीं भूलते। जसपाल अपनी एक वेबसाइट शुरू करना चाहते हैं। ताकि चाट के ऑनलाइन ऑर्डर बुक करें। पुरानी दिल्ली में उनकी दौलत की चाट नाम से आउटलेट शुरू करने की भी योजना है जिसके लिए वे निरंतर प्रयासरत हैं। 


Thursday, 5 January 2017

नटराज दही भल्‍ले- स्‍वाद जो भूले नहीं भूलता

दिल्ली, जहां जिंदगी जी भर कर जीने का एक नहीं दर्जनों बहाना मौजूद हैं। घुमने फिरने के शौकीन हैं तो पर्यटन स्थलों की भरमार है। खाने के शौकीन हैं तो दिल्ली के लगभग हर इलाके में चाट, पकौड़े समेत लजीज व्यंजनों की दुकानें आपको पसंद आएंगी। पुरानी दिल्ली में दही भल्ले के दीवाने भारत के कोने कोने से आते हैं। विदेशी पर्यटकों की भी अच्छी खासी चहल पहल दही भल्ले की दुकानों पर देखी जा सकती हैं। लेकिन एक दुकान जो खाने के शौकीनों की लिस्ट में टाप पर हैं वो हैं नटराज दही भल्ले। जी हां दही भल्ले तो आपने कई बार खाए होंगे लेकिन बमुश्किल ही किसी दुकान का जायजा याद होगा। लेकिन चांदनी चौक स्थित नटराज के दही भल्ले आपने एक बार खा लिए तो आपको बार बार यहां आने की वजह मिल जाएगी। 

चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन से चंद कदम की दूरी पर ही नटराज दही भल्ले की दुकान है। नटराज के दही भल्लों  का जायका न सिर्फ  दिल्ली वालों के बीच प्रसिद्ध है बल्कि चांदनी चौक में आने वाले पर्यटक भी यहां थोड़ी देर ठहरकर दही भल्ले का लुत्फ उठाना नहीं भूलते। सन 1940 से नटराज दही भल्ले का जायका लोगों को भा रहा है। 
विशेष विधि ये नटराज अपने दही भल्ले बनाते हैं। सोंठ वाली लाल चटनी का इस्तेमाल होता है। वहीं दही में जायफल की महक होती है और इसमें हल्का मीठापन भी है। दही भल्ले में ऐसे मसालों का इस्तेमाल किया गया है कि जो मीठेपन को जायके को संतुलन में रखता है। नटराज की आलू टिक्की का जायका भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। वह इसे सोंठ की चटनी और हरी चटनी के साथ लोगों को परोसते हैं। टिक्की की खास बात यह है कि यह काफी पतली और कुरकुरी है और इसमें अन्य किसी चीज का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इतने लजीज दही भल्ले और आलू टिक्की लोगों के बजट में भी हैं क्योंकि दोनों की कीमत प्रति प्लेट 30 रुपये है। 
नटराज के मुताबिक जब से चांदनी चौक में मेट्रो आई है तब से कारोबार और चमक गया है।

 मेट्रो के आने से राजधानी के दूर दराज के इलाकों से भी लोग दही भल्लों का जायका लेने आते हैं। जबकि दही भल्ले की दुकान के पास ज्यादा जगह मौजूद नहीं है। ऐसे में लोगों को दुकान से दूर खड़े होकर दही भल्ले खाने पड़ते हैं। इसके बावजूद बावजूद लोग यहां आना नहीं भूलते। नटराज के मुताबिक शादियों के दौरान कई दफा लोग अपने यहां दही भल्लों का स्टॉल लगवाने के लिए उनके पास आते हैं। हालांकि व्यस्तता के चलते वे खास लोगों को ही यह सेवा उपलब्ध करा पाते हैं। ग्राहकों की भीड़ को देखते हुए नटराज की दही भल्लों की यह दुकान सुबह 10 बजे खुलती है और रात नौ बजे तक यहां ग्राहकों के आने का सिलसिला जारी रहता है।